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"जन्मदिवस पर तुम्हें बधायी" बालकविता-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
Thursday, September 13, 2012
कार हमारी हमको भाती।। हिन्दीदिन पर इसको लाये। हम सब मन में थे हर्षाये।। आज तीसरा जन्मदिवस है। लेकिन अब भी जस की तस है।। यह सफर की सखी-सहेली। अब भी है ये नयी-नवेली।। साफ-सफाई इसकी करते। इसका ध्यान हमेशा धरते।। सड़कों पर चलती मतवाली। कभी न धोखा देने वाली।। सदा सँवारो सबका जीवन। चाहे जड़ हो या हो चेतन।। पूरे घर को तुम हो भायी। जन्मदिवस पर तुम्हें बधायी।। |
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कार का जन्मदिन,
बालकविता
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