कविता: "अँधेरी रात हो रही है"
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*"अँधेरी रात हो रही है"*
अँधेरी रात हो रही है।
न जुगनू है न तारे है आसमा में ।।
ऐसा क्यों लगता है की चाँद का मुखड़ा नराज़ सा है ?
सब तरफ सन्नाटा और दर्द से...
1 day ago