बचपन में बहूत ख्वाइशें थीं
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* कविता *
बचपन में बहूत ख्वाइशें थीं
पर बढ़ती उम्र में घटती चली गयी
डॉक्ट,पुलिस और इंजीनियर में जाना था
पर ज़िंदगी कुछ ही चीजों में अटकी रह गयी
सपनों के बा...
1 day ago