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"लीची होती बहुत रसीली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

Saturday, May 25, 2013

हरीलाल और पीली-पीली!
लीची होती बहुत रसीली!!
 IMG_1175
गायब बाजारों से केले।
सजे हुए लीची के ठेले।।
 
आम और लीची का उदगम।
मनभावन दोनों का संगम।।
 
लीची के गुच्छे हैं सुन्दर।
मीठा रस लीची के अन्दर।।
 IMG_1178
गुच्छा प्राची के मन भाया!
उसने उसको झट कब्जाया!!
 IMG_1179
लीची को पकड़ादिखलाया!
भइया को उसने ललचाया!!

प्रांजल के भी मन में आया!
सोचा इसको जाए खाया!!
IMG_1180 
गरमी का मौसम आया है!
लीची के गुच्छे लाया है!!
IMG_1177 
दोनों ने गुच्छे लहराए!
लीची के गुच्छे मन भाए!!

14 comments:

कविता रावत said...

गाँव जाते समय रामनगर में गर्मियों में खूब लीची मिलती हैं ....लीची देखकर मुहं में पानी आ गया

अरुणा said...

ठेले लदे हैं मौसमी फलों से
आपने सभी फलों को खूब सराहा ..........लीची पर सुन्दर कविता ...........

अरुणा said...

ठेले लदे हैं मौसमी फलों से
आपने सभी फलों को खूब सराहा ..........लीची पर सुन्दर कविता ...........

Onkar said...

वाह, बढ़िया रचना

अरुन शर्मा 'अनन्त' said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (26-05-2013) के चर्चा मंच 1256 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया
स्वादिष्ट मौसमी रचना

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया
स्वादिष्ट मौसमी रचना

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया
स्वादिष्ट मौसमी रचना

Devdutta Prasoon said...

अति सुन्दर बाल रचना !

सुमन कपूर 'मीत' said...

यम्म्म्म्म यम्म्म्म्म ...बहुत रसीली

Rajendra Kumar said...

वाह, लाल लाल लीची देख कर मुहं में पानी आ गया,बहुत ही सुन्दर चित्रों के साथ प्रस्तुतिकरण,धन्यबाद.

rohitash kumar said...

चमत्कार देखिए इस साल हमने अभी तक लीची का स्वाद नहीं चखा है ...सुबह होने दीजिए लीची महाराज को लाया जाएगा ...मन भर कर खाया जाएगा...तरबूज तो खा ही रहे हैं खरबूज भी खा लिए...आम तो आम आदमी की पहुंच से बाहर हुआ..फिर भी हमने खूब चख ही लिया...बस लीची की याद आपने दिलाई..तो कल ही देखिए ..पर पता नहीं लीची पर कुछ लिख पाए या नहीं कह नही सकते

अनूषा जैन said...

मेरी पसंदीदा पंक्तियां - गुच्छा प्राची के मन भाया!
उसने उसको झट कब्जाया!!
बच्चों के कब्जे भी बच्चों जैसे प्यारे होते हैं :)

अनूषा जैन said...

आपकी इस रचना की कढ़ी अपने फेसबुक पेज - "मैं हिंदी भाषी हूं" पर साझा कर रही हूँ - सूचनार्थ

नापतोल.कॉम से कोई सामान न खरीदें।

मैंने Napptol.com को Order number- 5642977
order date- 23-12-1012 को xelectron resistive SIM calling tablet WS777 का आर्डर किया था। जिसकी डिलीवरी मुझे Delivery date- 11-01-2013 को प्राप्त हुई। इस टैब-पी.सी में मुझे निम्न कमियाँ मिली-
1- Camera is not working.
2- U-Tube is not working.
3- Skype is not working.
4- Google Map is not working.
5- Navigation is not working.
6- in this product found only one camera. Back side camera is not in this product. but product advertisement says this product has 2 cameras.
7- Wi-Fi singals quality is very poor.
8- The battery charger of this product (xelectron resistive SIM calling tablet WS777) has stopped work dated 12-01-2013 3p.m. 9- So this product is useless to me.
10- Napptol.com cheating me.
विनीत जी!!
आपने मेरी शिकायत पर करोई ध्यान नहीं दिया!
नापतोल के विश्वास पर मैंने यह टैबलेट पी.सी. आपके चैनल से खरीदा था!
मैंने इस पर एक आलेख अपने ब्लॉग "धरा के रंग" पर लगाया था!

"नापतोलडॉटकॉम से कोई सामान न खरीदें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिस पर मुझे कई कमेंट मिले हैं, जिनमें से एक यह भी है-
Sriprakash Dimri – (January 22, 2013 at 5:39 PM)

शास्त्री जी हमने भी धर्मपत्नी जी के चेतावनी देने के बाद भी
नापतोल डाट काम से कार के लिए वैक्यूम क्लीनर ऑनलाइन शापिंग से खरीदा ...
जो की कभी भी नहीं चला ....ईमेल से इनके फोरम में शिकायत करना के बाद भी कोई परिणाम नहीं निकला ..
.हंसी का पात्र बना ..अर्थ हानि के बाद भी आधुनिक नहीं आलसी कहलाया .....

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