गाँव की गलियों से निकलकर
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कविता
गाँव की गलियों से निकलकर
शहरों की गलियों में
भटक क्यों रहा हूँ इन अनजान गलियों में
गलियारे ही बचे है क्या
क्यों खो गए खेत कहाँ
कहाँ खो गयी वो बू...
5 days ago
3 comments:
सुंदर
ग खूबशूरत अहसाह ,बहुत सुन्दर रचना
बहुत अच्छी रचना...
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