पढ़ते पढते ठंडी आ गया
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कविता
पढ़ते पढते ठंडी आ गया
कुछ पता नहीं चला
पढते पढते ठंडी आ गया
कुछ पता नहींचला
सपनो में सोचा की
ठंडी कितनी जल्दी आ गया
वो भी हमको पता नहीं चला
...
18 hours ago
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4 comments:
वाह बहुत सुंदर ।
अद्भुत एवं अनुपम प्रस्तुति ! अति सुन्दर !
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 25-9-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1747 में दिया गया है
आभार
जीवन की सुंदर प्रस्तुति।
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